चूड़धार यात्रा भाग 3

नमस्ते दोस्तों में फिर लेकर आया हूँ अपनी चूड़धार यात्रा अनुभव उम्मीद है आप को पसंद आएगा
दिल्ली में उतरने के बाद जाट देवता से दिशा निर्देश प्राप्त कर हम छत्तरपुर मंदिर के लिए निकल पड़े सिटीबस में सवार हो गए यह मेरी पहली बार सिटीबस में बैठेने का अनुभव था पूरी बस पैक थी हवा भी अंदर न आ सके ऐसी वाली बस में बैठ छतरपुर मंदिर जाने की बोला तो परिचालक बोला यह बस छत्तरपुर नही जायेगी आप को कुतुबमीनार के पास उतार देंगे वह से आपको दूसरी बस में बैठना होगा वो आप को छत्तरपुर मंदिर छोड़ देगी उनसे बस का नंबर लिया और जा बैठ सीट पर थोड़ी ही देर हुई थी की हलकी सी घबराहट होने लगी देखते ही देखते उल्टी होने की फिलिंग होने लगी मेने चरण से खा यार इस बस में घबराहट हो रही है तो वो बोले मुझे तो ऐसा कुछ भी नही लग रहा है परिचालक को बोला कितनी दूर और है क़ुतुब मीनार वह बोला बस दो स्टॉप और उसके बाद बड़े मुश्किल से अपने आप को संभाला और अहिंसा स्थल पर उतर गए उतरने के बाद थोड़ी देर फुटपात पर पेड़ की छाव में बैठ अपने आप को समान्य किया उस के बाद दूसरी वाली जो बिना ऐसी की थी उसमें बैठ छतरपुर मंदिर पहुचे मंदिर के गेट पर जुते रखने के लिए निशुल्क स्टैंड बनाया हुआ है जुते वहा जमा कर गेट से एंट्री ली और घूमने लगे इस मंदिर से उस मंदिर ऊपर मंदिर नीचे मंदिर लगभग 2 घंटे घूमने के बाद वहा से रवाना हुए और बस में बैठ लिए कुतुबमीनार की और वहां बस में से उतरे और एक मैदान में जाकर पेड़ की छाव में घर से लाया हुआ भोजन किया और रवाना हुए कुतुबमीनार के टिकिट घर  टिकट खरीदी और बैग दूसरे काउंटर पर जमा किये वहा से कुतुबमीनार के गेट पर टिकट बता कर अंदर गये कुतुबमीनार देखी कुछ फोटो लिए लोहस्तम्भ देखा और करीब 2 घंटे बाद वहा से बहार निकल देखा शौचालय बना हुआ है वहा पर बैठने वाले आदमी से कहा कि भाई नहाने की कोई व्यवस्ता है क्या तो उसने बोला हा 25 रूपये लगेंगे एक आदमी के फिर क्या था 50 रूपये दिए और आराम से नहा धोकर वापस तरोताज़ा हो गए और वह से अब हमें इंडिया गेट घूमना था बस पकड़ी और पहुच गये इंडिया गेट काफी अच्छी तरह घूमने के बाद प्यास बड़े जोरो की लगी तो एक बोतल ठंडा पानी और एक कोल्ड्रिंक की बोतल ले कर बैठ गए पेड़ की छाव में आराम से ठन्डे ठन्डे कूल कूल हो कर अब जाना था लालकिला देखने के लिए लाल किला में जाने के लिए टिकट लेनी पड़ी अंदर गये तो सबसे पहले संग्रालय में घूमे बहुत ही भीड़ थी अंदर थोड़ा बहुत देखा और वहा से निकल कर दीवाने आम में गये और देखा एक सफ़ेद रंग का बडासा तख्ता है और उसके सभी तरफ शीशे लगा रखे थे वहा से एक और म्यूसियम में गये वह थोड़ी कम भीड़ थी आराम से देखा पर फोटो खींचने की मनाही थी इस लिए एक भी फोटो नही लिया 2 घंटे घूमने के बाद अब और कई घूमने की इच्छा नही थी तो जाट देवता को कॉल किया हम अब यहा से निकल रहे है आप कहा मिलोगे जाट देवता से पहले ही बात हो गयी थी की 5 बजे बाद आप लोगो को में मिल जाऊंगा तो उन्होंने कहा तुम बहार निकल कर बैटरी वाले रिक्शे में बैठ कर शांति वन की लाल बत्ती पर पहुँचो में वही खडा मिलूंगा रिक्शे वाले ने 5 मिनिट में हमें वहा छोड़ दिया मुझे दूर से ही निलीपरी दिखी तो पास में ही संदीप भाई दिखे पहली बार देवता के दर्शन कर जीवन धन्य हो गया रिक्शा में से उतार कर संदीप भाई से मिलना हुआ बहुत ही बढ़िया पल थे वह मेरे जिंदगी के
संदीप भाई से मिलने के बाद भाई बोले की आप लोगों के पास अभी टाइम है पास में ही राजघाट है वहा भी घूम आओ पर हमारी तो थकान की वजह से घूमने की इच्छा नही थी इस लिए हमने मना कर दिया तो संदीप भाई बोले तो फिर चले घर हमने हा में सर हिलाया भाई बोले अभी एक बस तो गयी अभी दूसरी आती होगी में आप लोगो को उसमे बिठा देता हूँ और बस के साथ ही चलूंगा में इशारा करु और आप उतर जाना बस में सवार हो कर आगे आगे संदीप भाई और पीछे पीछे बस थोड़ी देर में ही बस ने हमें संदीप भाई के पास उतार दिया यहा से बैटरी वाले रिक्शा में जगतपुर गांव पहुचे उतरते ही संदीप भाई की नीली परी पर उनके घर पहुचे बहुत अच्छा लगा घर जाकर घर के सामने खुली जगह बहुत ही बढ़िया लगी कमरे में जाकर चारपाई पर बैठ गए इतने में जाट देवता ने ऐसी चालू कर दिया थोड़े ही समय में कमरा ठंडा हो गया और फिर बिटिया रानी ने हमे ठन्डे के रूप में पाइनेपल का रस लाकर दिया पिने के बाद बहुत ही अच्छा लगा फिर बातो का दौर शुरू हुआ दिन भर कहा कहा घूमे फोटो भी बताई फिर संदीप भाई ने कहा आप लोगो को नहाना है तो मैने तो मना कर दिया पर चरण बोले में तो नहाऊंगा फिर क्या था मेने भी हाथ ऊँचा कर दिया इतने में भाभी जी आ गयी नमस्ते किया और संदीप भाई ने हमारा परिचय दिया फिर माता जी से मिलना हुआ इन सब से मिलकर ऐसा लगा मानो में कही दूसरे के यहा नही बल्कि अपने ही घर में हूँ संदीप भाई ने बड़ी आव भगत करी हमारी इनकी मेहमाननवाजी देखकर दिल खुश हो गया अब हमारे बाकि साथी जो जाट देवता के घर आने वाले थे उनसे संपर्क किया गया नरेश भाई मथुरा वाले थोड़ी देर में आ गए उनसे मिलना भी शानदार रहा उसके बाद मनु  प्रकाश त्यागी भाई आये बड़े ही व्यवहारिक किस्म के भाई है इन सब से पहली बार मिलना हुआ पर ऐसा नही लगा की पहली बार मिले है फिर बातो का दौर शुरू हुआ देखते ही देखते पता ही नही चला कब हमारे यात्रा का समय हो गया














सब तैयार होकर चल दिए जहा हमें लेने के लिए भाई अनिल दीक्षित और भाई कमल कुमार सिंग खड़े थे इनसे मिलना तो बहुत ही गर्मजोशी के साथ हुआ वह सब बेग गाड़ी में रखकर बैठ गए इनोवा कार में चालक अनिल भाई उनके साथ बराबर वाली सीट पर कमल भाई पीछे वाली पर जाट देवता और नरेश भाई और उससे पीछे भाई चरण मनु भाई और मे और शीशे चढ़ा कर ऐसी चालू किया और निकल पड़े हिमाचल की और थोड़ी देर में मुझे वही समस्या फिर होने लगी मेने मनु भाई को बताया उन्होंने कहा आप आराम से पीठ टिकाकर सो जाओ आपको घबराहट नही होगी काफी कोशिश की पर घबराहट कम नही हों रही थी कुछ घंटे भर बाद जाट देवता को बोला भाई जरा गाड़ी साइड में लगाना अब सब्र का बांध टूट सकता है जल्दी से अनिल भाई ने गाड़ी साईट में लगाई और फाटक खोल कर बाहर निकल गया बांध टुटा बाढ़ आई और सब खाया पिया निकाल कर ले गयी अब थोड़ा ठीक लग रहा था वापस गाड़ी के पास आया तो देखा जाट भाई पीछे वाली मेरी जगह और मुझे उनकी जगह बिठा दिया और सारे शीशे उतार दिए और निकल गए फिर हमारे लक्ष्य की ओर आज के लिए बस इतना ही बाकि अगले भाग में

टिप्पणियाँ

  1. RAM RAM BHAI ....CHATTARPUR AAYE OR MILE BHI NA ...GALAT BAAT HAI ..VESE BAHUT SUNDER SURUWAT AGLE BHAG KA INTZAR RAHEGA

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  2. राकेश भाई धन्यवाद
    मिलना न हो सका उसका दुख मुझे भी है आप से जल्दी ही मुलाकात होगी बीकानेर घूमने का प्लान बनाते है जिसमे सभी भाइयो का साथ होगा

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  3. ऊँचाई पर मेरा भी जी मिचलाने लगता है चारचकिया में। बढ़िया संस्मरण।

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    1. धन्यवाद ललित शर्मा जी
      ऊँचाई पर जी मिचलाना ऑक्सीजन की कमी से भी होता है पर पैक गाड़ी में और जल्दी हालात खराब होती है
      खुली हवा की तो बात ही अलग है

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  4. सहजता और निरंतरता आ गयी है आपकी लेखनी मे
    पढ़ कर मजा आता है लोकेंद्र भाई👍👍😊

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    1. धन्यवाद अजय भाई जी
      सब आप लोगो का साथ है ऐसे ही सहयोग करते रहे

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  5. आगे के भाग का इंतज़ार रहेगा .. शानदार वर्णन

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  6. बिलकुल सजीव सा चित्रण। जैसे सब अपने सामने घट रहा हो।

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    1. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  7. मजा आने लगा है यात्रा ब्लॉग को पढ़ कर......

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  8. आज ही कुतुबमीनार का लेख पूरा किया है, सुबह पढने को मिल जायेगा,
    आपसे पहले बार मिलना, बहुत अच्छा लगा, एक किसान के साथ हम भी एक यात्रा कर आये।
    उल्टी का नाम नहीम लेने का, इस साल कार में तीन यात्रा की है, तीनों में बैंड बजी थी भाई, याद मत दिलाना, खाया पिया सब धमाके से बाहर,

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  9. हा हा हा क्या करूँ भाई अपना अनुभव बाट रहा हूँ आप से मिलना मेरी जिंदगी के यादगार लम्हो में से है आप के साथ और भी यात्रा करूँगा
    कुतुबमीनार का लेख पढ़ लिया बहुत ही बढ़िया है
    धन्यवाद

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  10. शानदार वर्णन लोकेंद्र भाई

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  11. जय भोलेनाथ

    बहुत बढिया संस्मरण

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