चूड़धार यात्रा भाग 2

नमस्ते दोस्तों तो में फिर लेकर आया हूँ अपने यात्रा अनुभव की दूसरी कड़ी।
मंदसौर रेल्वे स्टेशन पर ट्रैन के साथ
11 मई को सुबह उठ कर बैग पैक करना था। पर यहा एक और समस्या आ गयी ये की अपने पास तो बैग हाथ में उठाने वाला है और ट्रेकिंग के हिसाब से बैकपैक होना चाहिए । तो उसी समय चरण को कॉल किया और एक बैग और एक्स्ट्रा लाने की बोल दिया । उन्होंने बोला की में 9 बजे तक आपके यहा पहुच जाऊंगा आप तैयार रहना ठीक है । भाई आओ तो सही पर आने में लेट हो गए 10:30 बजे आ गए तो आते ही सीधे चाय पी और बेग में एक ड्रेस, टॉवेल, शॉल ,मफलर ,मोबाइल चार्जर, नकद रूपये, ए टी एम ,ड्राविंग लाइसेंस, आधार कार्ड जैसी जरूरी चीजे  डाल रवाना हो गए बस स्टैंड के लिए बस आयी 11:30 पर और आधे घंटे में मंदसौर उतर गये । मंदसौर में जहा बस रूकती है वही से दस कदम दूर अपना घर है जिसमे दुकाने है और सब किराये पर दे रखी है । पीछे की साईट कमरे खुली जगह कुआ सब सुविधाओ से परिपूर्ण कर रखा है । पास में ही भुवा जी का घर है उनका एक लड़का है जो मेरे से बड़े है उनका नाम अमर सिंह है।  फोटोग्राफी का बहुत शोक है इन्हें खुद का स्टूडियो खोल रहा है बहुत ही नेकदिल है किसी की भी मदद के लिए हर दम तैयार उनसे कहा जरा हमें रेलवे स्टेशन तक छोड़ दो ये कहने की देर और भाई ने बाइक निकाल ली चलो बेठो अभी छोड़ देता हूँ । और दस मिनिट में स्टेशन छोड़ दिया यात्रा के लिए शुभकामनाएँ दे कर उनसे विदाई ली । हमारी ट्रेन 2 बजे चलना थी इसलिए पहले आरक्षण सूचि देखी जाये पर हमें कोई सूचि नही मिली वैसे मोबाइल पर सन्देश आ गया था हम दोनों की  सीट कन्फर्म  हो गयी थी s11 नंबर के डिब्बे में 56 57 नंबर की ऊपर नीचे की सीट मिली थी।  ट्रैन का समय हो गया पर अभी तक नही आयी पता किया तो ट्रैन आधा घंटा लेट है 2:30 पर ट्रेन पहुची और दस मिनिट में यह से रवाना हो गयी। मतलब हमारी चूड़धार यात्रा शुरू ट्रैन में हमारे गांव के पास संजीत करके गांव है वहा का बन्दा मिला जो दिल्ली में आर्मी में नोकरी करता है । बहुत ही अच्छा लड़का था बोला नीमच से आप के ही समाज का अरनिया माली गांव का तूफान सिंह भी आ रहा है। मे और चरण तूफान सिंह को नही जानते थे तो नीमच में ही मुलाकात होगी कोण है। भाई तूफान सिंह चालीस मिनिट में नीमच पहुच गयी ट्रैन थोड़ी देर में तूफान सिंह भी आ गया वह भी हमें नही पहचानता था। गाड़ी बढ़ चली चित्तोड़गढ़ होते हुए मंडलगढ़ ,बूंदी, कोटा की और समय शाम के 7 बज गए इतने टाइम में पूरी तरह पहचान हो गयी तूफान सिंह से कोटा पहुचते ही ट्रेन आधा घंटा पड़ी रहती है। यहा पर बांद्रा से चलकर देहरादून जाने वाली ट्रेन नंबर 29029 देहरादून एक्सप्रेस से हमारी ट्रेन को जोड़ा जाता है।  तो सब ने कहा कि सभी घर से खाना लेकर आये है।  तो यही खाना खा लेते है । सब ने आराम से खाना खाया और बैठ गए ट्रैन में बढ़ चले मेरठ की और हमारा आरक्षण मेरठ का था।  जहाँ हमें डॉ कुलभूषण अजय त्यागी और हमारे ग्रुप के हीरो सन्नी मलिक से मिलना था । रात को अजय भाई से बात की और कहा कैसे पहुचना है इसकी पूछताछ की । सन्नी भाई से मुलाकात के चांस कम थे क्योंकि वह 11 की रात को सपरिवार गंगोत्री धाम को जा रहे थे।  उनको कॉल किया पर देर ज्यादा होने के कारण उन्होंने रिसिवड नही किया मेने एक सन्देश लिखकर उनको भेज दिया। रात में हमारे साथ वाले आर्मी के जवान ने कहा मथुरा में अपने बैग को सही रखना चोर उच्के बहुत है । वहाँ रात को करीब 2 बजे हमारी ट्रेन मथुरा पहुची में पहले ही अपने बैग को हाथों में फसा कर सो गया । सुबह 4: 30 पर नींद खुली खिड़की से बाहर देखा तो बड़ा धुंआ धुंआ बाहर दिख रहा था। मोबाइल में मैप चालू कर जगह कोनसी है । चेक किया तो दिल्ली के पास की स्टेशन थी।  इतना फ्लूशन देख सोचा अभी यह हाल है तो दिल्ली में क्या होता होगा सभी उठ गए थे।  मे पहले ही फ्रेश होकर आ गया था आर्मी वाले बोले हम तो हजरत निजामुदीन स्टेशन पर उतरेंगे ये बात सुनी और दिमाग में एक ख्याल आया क्यो ना हम भी यही उतर जाते है। पूरा दिन मेरठ में बिताने से अच्छा है। आज दिल्ली दर्शन करले यह बात चरण से कहि तो उन्होंने कहा हा यह ठीक रहेगा आज का दिन दिल्ली के नाम सवा पांच बजे ट्रेन ह निजामुदीन स्टेशन पर जा पहुची और हम अपने बैग लेकर उतर गए दिल्ली देखने के लिए स्टेशन पर सब के साथ सेल्फी ली। और सभी से विदा ली मेने उसी समय जाटदेवता को सुचना दी की हम दिल्ली में उतर गये है तो अब पहले यहा पर घूमने लायक जगह कोनसी ठीक रहेगी तो उन्होंने कहा आप पहले दूर का देखो जैसे छत्तरपुर मंदिर ,कुतुबमीनार जो 8 बजे खुलती है पहले वह घूम लो फिर कॉल करना स्टेशन से कुछ दूर ओवरब्रिज के पास से हमें छत्तरपुर मंदिर के लिए सिटीबस मिल गयी और चल दिए छत्तरपुर मंदिर देखने के लिए अब आज के लिए बहूत अब आगे की यात्रा अगले भाग में
स्थानीय दोस्तों के साथ 

टिप्पणियाँ

  1. लोकेंद्रभाई मथुरा वाले नाराज हो जाएंगे आपसे,
    शानदार लेखन

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  2. हा हा मुझे इस बात का तो ध्यान ही नही रहा चलो अभी उनसे क्षमा मांगते हूँ
    धन्यवाद

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  3. बहुत अच्छे तरीक़े से वर्णन किया है यात्रा का आपने लोकेंद्र भाई

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  4. लोकेन्द्र जी अच्छा लिखतें हैं। फॉण्ट छोटे हैं पढ़ने में दिक्कत आती है।

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  5. धन्यवाद वशिष्ठ जी अभी बड़े कर देता हूँ

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  6. क्या बात है बहूत बडिया वर्णन किया है

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  7. बहुत बढिया भाई जी

    दिल्ली से आगे बढो अब

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  8. धन्यवाद अनिल भाई दिल्ली से आगे बढ़ेंगे पहले दिल्ली तो घूम ले

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  9. गाड़ी बढ़ चली चित्तोड़गढ़ होते हुए मंडलगढ़ ,बूंदी, कोटा की और समय शाम के 7 बज गए इतने टाइम में पूरी तरह पहचान हो गयी ! बहुत बार का देखा हुआ रूट है ये तो अपना ! पूरी पोस्ट दो दिन पहले पढ़ ली थी लेकिन कमेंट नहीं हो पा रहा था ! दिल्ली के कुछ फोटो - सोटो तो दिखाते लोकेन्द्र जी ? चलो आपने आनंद लिया

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